Friday, December 8, 2023

मुखौटा

हयात की तलाश में खुशियों का हिसाब कर चुका है,
माँ की परवाह से मोहब्बत की पहचान तक,
कुछ खो चुका है, और कुछ बँट गया है।
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लड़कपन गुजर गया उसका, अब मर्द बन रहा है वो! 

कभी जज़्बात में, कभी हालात में,
कभी साज में और कभी अल्फ़ाज़ में ।
कभी अंजाम में तो कभी आग़ाज़ में,
कभी शाम में तो कभी पैग़ाम में ॥
आँचल की छाँव से, पायल की झंकार तक,
कुछ बँट सा गया है वो !

ममता की पुकार से, इश्क़ की ललकार तक,
हर पल बँटा है वो।
कभी सिंदूर की लाज में और कभी कोख के उधार में,
बस बंटता रहा है वो  !

… मर गया बचपन, गुजर गई जवानी,
अब बन गया है मर्द वो .!

Wednesday, November 8, 2023

तू है…

मुझे इल्म है तेरी हर शिकायत का..

जिनसे तारूफ़ वफ़ा नहीं, वक़्त ने किया हैं, 

पर ये भी रुतबा है तेरे इश्क़ का..
जिसने वक़्त की दरिया में वफ़ा बांध लिया है।

अब इसे नाकामी नहीं, इंतहान ही समझ लेना, 
आशिक़ ना सही, फ़रियादी ही समझ लेना।

तू मंज़िल है अगर.!
तो तेरे रास्ते में हासिल हर मुक़ाम बेजान बियाबान नज़र आते हैं।
तू ख़्वाब है अगर.!
तो तेरे ख़्वाब-ओ-मिलन की ख़ुशबू मेरे अक्स को महकाते हैं|
हैं कोशिशें बेशुमार जो क्षितिज से एक झरोखा उधार माँग लूँ,

पर बहुत मुश्किल है उस दरार का दीदार,
जहां से रोशनी और अंधेरा समान नज़र आते हैं॥

Thursday, October 19, 2023

कुल्हड़ की उधारी



मेरी चाहत है कि मैं अपने आज से कुछ पिछड़ जाऊँ,
अपनी यादों के आशियाने में कुछ लम्हे पीछे चला जाऊँ।

रह गई थी कुछ चाहतें वहाँ अधूरी..
जहां उम्मीदों में मचलती मोहब्बत नाकाम थी,
कम थे रुपये पर ज़िंदगी आसान थी !
थोड़ी मोहलत दे दो मेरे आज से, बीते कल में उन्हें वहीं जी आऊँ॥

…

कुछ रह गई है यारी की उधारी, नुक्कड़ चाय पे उसे सुलटा आऊँ।


Sunday, October 15, 2023

रब पे उधार…

 है उसकी ही मर्ज़ी जो उसने हमें तुमसे मिलाया है,

कभी सोचा ना, उस दोस्ती के काबिल बनाया है।

कुछ कर्म उधार थे शायद रब पर हमारे,

इस मतलबी सी दुनिया में, तुझे मेरा दोस्त बनाया है।

Thursday, October 5, 2023

तजुर्बा ऐ इश्क़



शायद तू मेरा पहला प्यार नहीं…
पर तजुर्बा मेरे इश्क़ का बस इतना है,
की तेरा होना अब मेरे होने का बहाना है।
बेशक तेरी बाहों में किसी खुशनसीब का आशियाना है,
पर खुश हूँ के दिल में तेरे, मेरा भी एक ठिकाना है ॥

Friday, August 18, 2023

रेत पे कदम


जो छलक जातीं ये!  तो होंठों की मुस्कान, झूठी, बदनाम हो जाती,

…पलकों नें अशकों को क्या खूब सम्भाला है!

मेरे ज़ख़्म ढूँढने की कोशिश भी मत करना मेरे दोस्त,

मैंने बहती हुई रेत पे कदमों का छाप छुपाया है।।

Saturday, August 5, 2023

दोस्ती का कल..

सोचो के कल हम कहाँ होंगे,

ना रास्ते राह बदलेंगे,  ना मुश्किलें मंज़िल..।

कुछ कम कमा के भी बेशक बेपरवाह मुस्कुरा लेंगे,
पर छूट गए जो यार राह में, 
तो कर फ़तह आसमाँ, क़ीमत गँवा देंगे.

सोचो के कल हम जहां होंगे,
ढलता सूरज तुम भी देखोगे, बिखरती चाँदनी हम भी दर्शेंगे।

याद आये जो अब हमारी तो नज़र मत झुकाना,
दोस्ती नाकाम समझ, आंसू मत बहाना,
आँखे खोल बाहें फैला के देखना वहाँ,
 जहां आसमाँ कुछ नीला होगा, 
 एक किनारा तुम्हारा होगा और …
…दूर कहीं एक किनारा हमारा होगा..!

Friday, July 21, 2023

पन्ने



 कुछ स्याही ले लिया हमनें, कुछ पन्ने हयात के लिख डाले।
उधार की स्याही थी जनाब…
२ शब्द खूबसूरत लिखे, बाक़ी सब नम डाले॥ 

Saturday, July 15, 2023

दूरियाँ


अंजाम कहाँ सभी को माशूक़ होता है,
पैगाम कहां मोहब्बत से बे-ताहरूफ होता है! 
हुआ तो हुआ यूं कि...
कहीं एतबार हो जाता है, कभी एहसास रह जाता है।
अब जो सोचता हूं तुझे तो सिमटती है चांदनी मेरी,
तुझसे दूरियों में शाम, शमशान सा नजर आता है |

 

 

Thursday, July 13, 2023

खनक


पहचान पूछा था..?  
मैं हर शाम अनजान हूँ ।
जर्रा दर्रा ढूँढा था.?
तेरे मैं में हम.. मेरे हम में तुम, मैं  रूहदारी हूँ…।
तेरी हँसती खनक भी बसती है साँसों में मेरे,
...
और तुम सुन के भी सुन ना पाये,  मैं सन्नाटे की आवाज़ हूँ..!

Tuesday, July 4, 2023

तिनके

 

ये अकेली इक जान क़ाबिलियत हो ही नहीं सकती,

तेरे शिखर तक सफ़र के हर मोड़ पे, 
कुछ हमसफ़र अनाम शरीक हैं।

बहुत मशरूफ़ हो गये तुम तारीफ़ों में,
एक नज़र देखो तो सही,

बैया कि घोंसले में तिनके बहुत बारीक हैं ॥


Saturday, May 20, 2023

सच या सही

 क्यूँ काढ़े क़सीदे पतझड़ की शाख़ों पे,

क्यों बाँटे वादे पूनमी चाँद-सितारों के ?

क्यों हो पहरा सोच का, कहो ना अपनी अनकही,

क्यों ये मैं तय करूँ, तू सच है या सही.!


Sunday, May 7, 2023

लहरें..

​जिस नज़ाकत से ये समुन्दर की लहरें,

किनारों पे आ पैरों को छू के जाती हैं ।

यक़ीन कहाँ होता है,

 के इन्होंने कभी कश्तियाँ डुबोयी होंगी॥

Saturday, April 29, 2023

चाँदनी


दरख़्तों से पुराने सामान समेट रहा था,
कुछ तस्वीरों में मेरे साथ, तुम वापस नज़र आयी।
….
यादों में ज्येष्ठ की रातें थी,
गाँव के पोखर से छलकती चाँदनी बिसरायी ॥

Thursday, April 13, 2023

तजुर्बा

 तजुर्बा चाहो तो कुछ मिटा दो अपनी हस्ती को,

के दान ख़ाक में मिलकर गुल ए गुलज़ार होता है।

मतलब की है दुनिया, कौन किसका होता है,

अरे धोखा तो वही देता है, जिसपे भरोसा होता है ॥

Sunday, April 9, 2023

खामोशी


मंजिलें मिलके बदल जाती हैं, 
मुझे मेरे रास्ते पसंद हैं।

ख़ुद ख़ैरियत की तसल्ली अब दूर से टेलीफोन पर दे जाते हैं,
मुझे इन ‘दूरियों’ से दूरियाँ पसंद है ॥

...

निःशब्द होना यूँ तो फ़ितरत नहीं हमारी, पर,
बहुत शोर है मेरे अंदर, और मुझे खामोशी पसंद है…

Saturday, January 14, 2023

समझदार अल्हड़..!

​कल किसी नासमझ ने 'अल्हड़’ के आदी को समझदार कह दिया,          
मगरूर से मन में मेरे इठलाते 'मैं' का सामना 'हम' से हो गया।
जंग अच्छी थी मिजाज के जुबानों की,  
और कलम को अपना रोज़गार मिल गया ॥                              

सरकते डब्बों में ख़ुद को बंद कर लिया क्या ?
अब traffic का हिस्सा बन उसी में झल्लाये बैठे हो,
हम तो तीन यार, कैंची मार साइकिल पे सवार अच्छे थे।
‘मैं’ ने ख्वाहिशों को जरुरत ए आम बना लिया है, 
हम अंध स्पर्धा से अंजान ही अच्छे थे॥

ले लिया क्या toothpaste में नमक स्वादानुसार?
हम तो बचपन से colgate ही अच्छे थे ।
सुना है हिमालय से नामक भी गुलाबी आया है!
हम तो TATA Salt ही अच्छे थे॥

दोस्तों के नाम उपनाम में पहचान ढूँढते हो?
हम तो ‘चल बे साले’ ही अच्छे थे।
Golf, snooker सीख लिया जीतना? 
हम खो-खो, कबड्डी ही अच्छे थे ॥

देखा है google siri सुना रहे अब बच्चों को लोरियाँ, 
हमें तो नानी, दादी के क़िस्से ही अच्छे थे।
वक़्त की क़ीमत से अनजान हो अभी, लगा लो OTT सारे, 
हम तो हर इतवार ‘सुरभि’, ‘रंगोली’ ही अच्छे थे ॥

zomato swiggy ने जगह बना ली है खर्च कि खातों में,
हमें तो माँ के हाथ से २ निवाले ही अच्छे थे।
यक़ीन मानों समझदारी का ठप्पा छलावा है..!
हम नादान.., बेईमान से अच्छे थे॥

Friday, January 6, 2023

छाँव

 


ये अनंत स्याह रात सी ज़िंदगी है, सन्नाटे में शोर लपेटे हुए,
एक अरसा गुजर गया बेफ़िक्री से पलकें समेटे हुए,
अक्सर ढूँढता हूँ वो पापा कि परछाईं, 
जहां तूफ़ानों में भी नींद आ जाती थी.!