कुछ खो चुका है, और कुछ बँट गया है।
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लड़कपन गुजर गया उसका, अब मर्द बन रहा है वो!
A tweety of desire blossoms in each heart... only few grow their wings strong enough to make a flight in veracity.
मुझे इल्म है तेरी हर शिकायत का..
जिनसे तारूफ़ वफ़ा नहीं, वक़्त ने किया हैं,
पर ये भी रुतबा है तेरे इश्क़ का..
जिसने वक़्त की दरिया में वफ़ा बांध लिया है।
तू मंज़िल है अगर.!
तो तेरे रास्ते में हासिल हर मुक़ाम बेजान बियाबान नज़र आते हैं।
तू ख़्वाब है अगर.!
तो तेरे ख़्वाब-ओ-मिलन की ख़ुशबू मेरे अक्स को महकाते हैं|
हैं कोशिशें बेशुमार जो क्षितिज से एक झरोखा उधार माँग लूँ,
…
कुछ रह गई है यारी की उधारी, नुक्कड़ चाय पे उसे सुलटा आऊँ।
है उसकी ही मर्ज़ी जो उसने हमें तुमसे मिलाया है,
कभी सोचा ना, उस दोस्ती के काबिल बनाया है।
कुछ कर्म उधार थे शायद रब पर हमारे,
इस मतलबी सी दुनिया में, तुझे मेरा दोस्त बनाया है।
जो छलक जातीं ये! तो होंठों की मुस्कान, झूठी, बदनाम हो जाती,
…पलकों नें अशकों को क्या खूब सम्भाला है!
मेरे ज़ख़्म ढूँढने की कोशिश भी मत करना मेरे दोस्त,
मैंने बहती हुई रेत पे कदमों का छाप छुपाया है।।
ये अकेली इक जान क़ाबिलियत हो ही नहीं सकती,
बैया कि घोंसले में तिनके बहुत बारीक हैं ॥
क्यूँ काढ़े क़सीदे पतझड़ की शाख़ों पे,
क्यों बाँटे वादे पूनमी चाँद-सितारों के ?
क्यों हो पहरा सोच का, कहो ना अपनी अनकही,
क्यों ये मैं तय करूँ, तू सच है या सही.!
जिस नज़ाकत से ये समुन्दर की लहरें,
किनारों पे आ पैरों को छू के जाती हैं ।
यक़ीन कहाँ होता है,
के इन्होंने कभी कश्तियाँ डुबोयी होंगी॥
तजुर्बा चाहो तो कुछ मिटा दो अपनी हस्ती को,
के दान ख़ाक में मिलकर गुल ए गुलज़ार होता है।
मतलब की है दुनिया, कौन किसका होता है,
अरे धोखा तो वही देता है, जिसपे भरोसा होता है ॥
...
ये अनंत स्याह रात सी ज़िंदगी है, सन्नाटे में शोर लपेटे हुए,
एक अरसा गुजर गया बेफ़िक्री से पलकें समेटे हुए,
अक्सर ढूँढता हूँ वो पापा कि परछाईं,
जहां तूफ़ानों में भी नींद आ जाती थी.!