Thursday, October 19, 2023

कुल्हड़ की उधारी



मेरी चाहत है कि मैं अपने आज से कुछ पिछड़ जाऊँ,
अपनी यादों के आशियाने में कुछ लम्हे पीछे चला जाऊँ।

रह गई थी कुछ चाहतें वहाँ अधूरी..
जहां उम्मीदों में मचलती मोहब्बत नाकाम थी,
कम थे रुपये पर ज़िंदगी आसान थी !
थोड़ी मोहलत दे दो मेरे आज से, बीते कल में उन्हें वहीं जी आऊँ॥

…

कुछ रह गई है यारी की उधारी, नुक्कड़ चाय पे उसे सुलटा आऊँ।


Sunday, October 15, 2023

रब पे उधार…

 है उसकी ही मर्ज़ी जो उसने हमें तुमसे मिलाया है,

कभी सोचा ना, उस दोस्ती के काबिल बनाया है।

कुछ कर्म उधार थे शायद रब पर हमारे,

इस मतलबी सी दुनिया में, तुझे मेरा दोस्त बनाया है।

Thursday, October 5, 2023

तजुर्बा ऐ इश्क़



शायद तू मेरा पहला प्यार नहीं…
पर तजुर्बा मेरे इश्क़ का बस इतना है,
की तेरा होना अब मेरे होने का बहाना है।
बेशक तेरी बाहों में किसी खुशनसीब का आशियाना है,
पर खुश हूँ के दिल में तेरे, मेरा भी एक ठिकाना है ॥