सूनी दिखाती है चाँदी की चौखट तुम्हारी,
गाँव की यारियाँ गँवा कर क्या सिर्फ़ रुपया ही कमाया है?
गाँव की यारियाँ गँवा कर क्या सिर्फ़ रुपया ही कमाया है?
ख़ैर…
सूनापन सताये तो बाअदब इस पार आ जाना,
पुराने क़िस्सों - कहकहों का हिस्सा, इसी शाम बन जाना।
भेंट, रोष और गुमान की क्या दरकार, तुम दिलख़ुश बेतकल्लुफ़ आना,
मैंने मेरा आशियाना दोस्ती के रंग से सजाया है ।।
पुराने क़िस्सों - कहकहों का हिस्सा, इसी शाम बन जाना।
भेंट, रोष और गुमान की क्या दरकार, तुम दिलख़ुश बेतकल्लुफ़ आना,
मैंने मेरा आशियाना दोस्ती के रंग से सजाया है ।।
खुश हूँ के कहीं मंज़िल को छोड़ कर और कभी नाकामियों से लड़ कर,
शहर की गलियों में, गाँव की मिट्टी से एक घर बनाया है।।

