Saturday, April 29, 2023

चाँदनी


दरख़्तों से पुराने सामान समेट रहा था,
कुछ तस्वीरों में मेरे साथ, तुम वापस नज़र आयी।
….
यादों में ज्येष्ठ की रातें थी,
गाँव के पोखर से छलकती चाँदनी बिसरायी ॥

Thursday, April 13, 2023

तजुर्बा

 तजुर्बा चाहो तो कुछ मिटा दो अपनी हस्ती को,

के दान ख़ाक में मिलकर गुल ए गुलज़ार होता है।

मतलब की है दुनिया, कौन किसका होता है,

अरे धोखा तो वही देता है, जिसपे भरोसा होता है ॥

Sunday, April 9, 2023

खामोशी


मंजिलें मिलके बदल जाती हैं, 
मुझे मेरे रास्ते पसंद हैं।

ख़ुद ख़ैरियत की तसल्ली अब दूर से टेलीफोन पर दे जाते हैं,
मुझे इन ‘दूरियों’ से दूरियाँ पसंद है ॥

...

निःशब्द होना यूँ तो फ़ितरत नहीं हमारी, पर,
बहुत शोर है मेरे अंदर, और मुझे खामोशी पसंद है…