क्यूँ काढ़े क़सीदे पतझड़ की शाख़ों पे,
क्यों बाँटे वादे पूनमी चाँद-सितारों के ?
क्यों हो पहरा सोच का, कहो ना अपनी अनकही,
क्यों ये मैं तय करूँ, तू सच है या सही.!
A tweety of desire blossoms in each heart... only few grow their wings strong enough to make a flight in veracity.
क्यूँ काढ़े क़सीदे पतझड़ की शाख़ों पे,
क्यों बाँटे वादे पूनमी चाँद-सितारों के ?
क्यों हो पहरा सोच का, कहो ना अपनी अनकही,
क्यों ये मैं तय करूँ, तू सच है या सही.!
जिस नज़ाकत से ये समुन्दर की लहरें,
किनारों पे आ पैरों को छू के जाती हैं ।
यक़ीन कहाँ होता है,
के इन्होंने कभी कश्तियाँ डुबोयी होंगी॥