Friday, January 6, 2023

छाँव

 


ये अनंत स्याह रात सी ज़िंदगी है, सन्नाटे में शोर लपेटे हुए,
एक अरसा गुजर गया बेफ़िक्री से पलकें समेटे हुए,
अक्सर ढूँढता हूँ वो पापा कि परछाईं, 
जहां तूफ़ानों में भी नींद आ जाती थी.!


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