तू है या नहीं, जवाब बता अब कहाँ से लाऊँ… !?
जो किया तूने इशारा भी जवाब का, मैं ख़ुद से जीत जाऊँ ।
कहाँ करूँ तुझे तलाश, तेरे अक्स का पता नहीं।
बस इतना है पहचाना के तू है अनंत, तू ही है अंत भी ॥
जो तुझे मिल जाऊँ अगर, जानें क्या क्या कर जाऊँ.!
तू बन आ जोगी मैं धूनी रमाऊँ, तू उठा डमरू मैं नग बन जाऊँ॥


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