कल किसी नासमझ ने 'अल्हड़’ के आदी को समझदार कह दिया,
मगरूर से मन में मेरे इठलाते 'मैं' का सामना 'हम' से हो गया।
जंग अच्छी थी मिजाज के जुबानों की,
मगरूर से मन में मेरे इठलाते 'मैं' का सामना 'हम' से हो गया।
जंग अच्छी थी मिजाज के जुबानों की,
और कलम को अपना रोज़गार मिल गया ॥
सरकते डब्बों में ख़ुद को बंद कर लिया क्या ?
अब traffic का हिस्सा बन उसी में झल्लाये बैठे हो,
हम तो तीन यार, कैंची मार साइकिल पे सवार अच्छे थे।
‘मैं’ ने ख्वाहिशों को जरुरत ए आम बना लिया है,
हम अंध स्पर्धा से अंजान ही अच्छे थे॥
ले लिया क्या toothpaste में नमक स्वादानुसार?
हम तो बचपन से colgate ही अच्छे थे ।
सुना है हिमालय से नामक भी गुलाबी आया है!
हम तो TATA Salt ही अच्छे थे॥
दोस्तों के नाम उपनाम में पहचान ढूँढते हो?
हम तो ‘चल बे साले’ ही अच्छे थे।
Golf, snooker सीख लिया जीतना?
हम खो-खो, कबड्डी ही अच्छे थे ॥
Golf, snooker सीख लिया जीतना?
हम खो-खो, कबड्डी ही अच्छे थे ॥
देखा है google siri सुना रहे अब बच्चों को लोरियाँ,
हमें तो नानी, दादी के क़िस्से ही अच्छे थे।
वक़्त की क़ीमत से अनजान हो अभी, लगा लो OTT सारे,
हम तो हर इतवार ‘सुरभि’, ‘रंगोली’ ही अच्छे थे ॥
zomato swiggy ने जगह बना ली है खर्च कि खातों में,
हमें तो माँ के हाथ से २ निवाले ही अच्छे थे।
यक़ीन मानों समझदारी का ठप्पा छलावा है..!
हम नादान.., बेईमान से अच्छे थे॥
हम नादान.., बेईमान से अच्छे थे॥

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