पहचान पूछा था..?
मैं हर शाम अनजान हूँ ।
जर्रा दर्रा ढूँढा था.?
तेरे मैं में हम.. मेरे हम में तुम, मैं रूहदारी हूँ…।
तेरी हँसती खनक भी बसती है साँसों में मेरे,
...
और तुम सुन के भी सुन ना पाये, मैं सन्नाटे की आवाज़ हूँ..!
A tweety of desire blossoms in each heart... only few grow their wings strong enough to make a flight in veracity.
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