Friday, August 18, 2023

रेत पे कदम


जो छलक जातीं ये!  तो होंठों की मुस्कान, झूठी, बदनाम हो जाती,

…पलकों नें अशकों को क्या खूब सम्भाला है!

मेरे ज़ख़्म ढूँढने की कोशिश भी मत करना मेरे दोस्त,

मैंने बहती हुई रेत पे कदमों का छाप छुपाया है।।

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