तिजोरी छोड़ रिश्तों की गाँव में, हम सिक्कों की बाज़ी खेलने शहर आ गये,
जहाँ कोशिशों में जीत थी, हम उम्मीदों से हार गये…
सौदा सादा था,
और वो सब मुझसे जीत गये जो घर छोड़ के नहीं गये ।।
A tweety of desire blossoms in each heart... only few grow their wings strong enough to make a flight in veracity.
तिजोरी छोड़ रिश्तों की गाँव में, हम सिक्कों की बाज़ी खेलने शहर आ गये,
जहाँ कोशिशों में जीत थी, हम उम्मीदों से हार गये…
सौदा सादा था,
और वो सब मुझसे जीत गये जो घर छोड़ के नहीं गये ।।
फूंक फूंक रखते नन्हें कदम, जैसे हर साँस है सहमा,
वहम जाने यह कैसे पनपा.?
फिर है नफ़रतों का बादल गहराया,
फिर हुआ है हिंसा का आलिंगन..
है सतह स्याह रक्तचरित..,
क्या चाहता है बन्दे, और क्या माँगता अब तेरा मन?
दिया जहां दावक़ी ने निर्मल गलियारा, अब वहाँ सीमाओं का बेड़ा,
वो कश तुम्हारी थी,
उड़ गया जो धुआँ हमारा हुआ;
इस इश्क़ का इखलाक तुम्हारा था,
और.., ये इत्तेफाक हमारा हुआ ।
मुझे इल्म है तेरी हर शिकायत का..
जिनसे तारूफ़ वफ़ा नहीं, वक़्त ने किया हैं,
पर ये भी रुतबा है तेरे इश्क़ का..
जिसने वक़्त की दरिया में वफ़ा बांध लिया है।
तू मंज़िल है अगर.!
तो तेरे रास्ते में हासिल हर मुक़ाम बेजान बियाबान नज़र आते हैं।
तू ख़्वाब है अगर.!
तो तेरे ख़्वाब-ओ-मिलन की ख़ुशबू मेरे अक्स को महकाते हैं|
हैं कोशिशें बेशुमार जो क्षितिज से एक झरोखा उधार माँग लूँ,