Sunday, August 25, 2024

हार - जीत


तिजोरी छोड़ रिश्तों की गाँव में, हम सिक्कों की बाज़ी खेलने शहर आ गये,

जहाँ कोशिशों में जीत थी, हम उम्मीदों से हार गये…

सौदा सादा था,

और वो सब मुझसे जीत गये जो घर छोड़ के नहीं गये ।।

Saturday, August 10, 2024

छाया रंग

 

फूंक फूंक रखते नन्हें कदम, जैसे हर साँस है सहमा,
वहम जाने यह कैसे पनपा.?
फिर है नफ़रतों का बादल गहराया, 

फिर हुआ है हिंसा का आलिंगन..
है सतह स्याह रक्तचरित..,
क्या चाहता है बन्दे, और क्या माँगता अब तेरा मन?

हुआ तेरा अंचल चाँदनी, या मेरा सतरंगी; 
हरित, सफ़ेद या सुर्ख़ केसरी, 
मानो इनसे ही महाभारत रचायी।

दिया जहां दावक़ी ने निर्मल गलियारा, अब वहाँ सीमाओं का बेड़ा, 

है क़रीब जैसे गंगा का आँगन, कब हिन्द ने चाहा कोई अलग वतन?
....
अब है यक़ीन की इंतहान..
सजायाफ़्ता होगी इंसानियत., या हो जाएगा सुदूर अमन..!
छाया में मज़हब छुपायी, रंगों को ये कैसी पहचान बतायी.?

Tuesday, July 16, 2024

टपकती बूँदें

 

कभी गर्म चाय की प्याली में, 
बारिश की शीतल बूँदों को टपकते देखा है?
…
प्यार और ग़ुस्से में ज़्यादा फ़र्क़ नहीं है उसके…
कभी ग़ुस्से से डाँटते वक़्त माँ को रोते देखा है..!


Thursday, June 6, 2024

मिट्टी का घर..

 


सूनी दिखाती है चाँदी की चौखट तुम्हारी,
गाँव की यारियाँ गँवा कर क्या सिर्फ़ रुपया ही कमाया है?

ख़ैर… 
सूनापन सताये तो बाअदब इस पार आ जाना,
पुराने क़िस्सों - कहकहों का हिस्सा, इसी शाम बन जाना।
भेंट, रोष और गुमान की क्या दरकार, तुम दिलख़ुश बेतकल्लुफ़ आना,
मैंने मेरा आशियाना दोस्ती के रंग से सजाया है ।।

खुश हूँ के कहीं मंज़िल को छोड़ कर और कभी नाकामियों से लड़ कर,
शहर की गलियों में, गाँव की मिट्टी से एक घर बनाया है।।

Wednesday, May 1, 2024

धुआँ..!


वो कश तुम्हारी थी, 

उड़ गया जो धुआँ हमारा हुआ;

इस इश्क़ का इखलाक तुम्हारा था, 

और.., ये इत्तेफाक हमारा हुआ ।



Friday, December 8, 2023

मुखौटा

हयात की तलाश में खुशियों का हिसाब कर चुका है,
माँ की परवाह से मोहब्बत की पहचान तक,
कुछ खो चुका है, और कुछ बँट गया है।
.
.
लड़कपन गुजर गया उसका, अब मर्द बन रहा है वो! 

कभी जज़्बात में, कभी हालात में,
कभी साज में और कभी अल्फ़ाज़ में ।
कभी अंजाम में तो कभी आग़ाज़ में,
कभी शाम में तो कभी पैग़ाम में ॥
आँचल की छाँव से, पायल की झंकार तक,
कुछ बँट सा गया है वो !

ममता की पुकार से, इश्क़ की ललकार तक,
हर पल बँटा है वो।
कभी सिंदूर की लाज में और कभी कोख के उधार में,
बस बंटता रहा है वो  !

… मर गया बचपन, गुजर गई जवानी,
अब बन गया है मर्द वो .!

Wednesday, November 8, 2023

तू है…

मुझे इल्म है तेरी हर शिकायत का..

जिनसे तारूफ़ वफ़ा नहीं, वक़्त ने किया हैं, 

पर ये भी रुतबा है तेरे इश्क़ का..
जिसने वक़्त की दरिया में वफ़ा बांध लिया है।

अब इसे नाकामी नहीं, इंतहान ही समझ लेना, 
आशिक़ ना सही, फ़रियादी ही समझ लेना।

तू मंज़िल है अगर.!
तो तेरे रास्ते में हासिल हर मुक़ाम बेजान बियाबान नज़र आते हैं।
तू ख़्वाब है अगर.!
तो तेरे ख़्वाब-ओ-मिलन की ख़ुशबू मेरे अक्स को महकाते हैं|
हैं कोशिशें बेशुमार जो क्षितिज से एक झरोखा उधार माँग लूँ,

पर बहुत मुश्किल है उस दरार का दीदार,
जहां से रोशनी और अंधेरा समान नज़र आते हैं॥