… और फिर इस बात का सुकून था,
तेरा हाथ बेशक साथ नहीं, पर तू ख़ुद हर पल साथ था।
A tweety of desire blossoms in each heart... only few grow their wings strong enough to make a flight in veracity.
मेरे वजूद के ग़ुरूर ने कभी उसको मशहूर नहीं देखा है,
है फ़ख़्र उसे, उसने उम्र भर अपना घर भरपूर देखा है।
किस्सा कौन लिखे इन हालात का.!
क्या कभी किसी की इल्मियत को इतना मजबूर देखा है.?
तिजोरी छोड़ रिश्तों की गाँव में, हम सिक्कों की बाज़ी खेलने शहर आ गये,
जहाँ कोशिशों में जीत थी, हम उम्मीदों से हार गये…
सौदा सादा था,
और वो सब मुझसे जीत गये जो घर छोड़ के नहीं गये ।।
फूंक फूंक रखते नन्हें कदम, जैसे हर साँस है सहमा,
वहम जाने यह कैसे पनपा.?
फिर है नफ़रतों का बादल गहराया,
फिर हुआ है हिंसा का आलिंगन..
है सतह स्याह रक्तचरित..,
क्या चाहता है बन्दे, और क्या माँगता अब तेरा मन?
दिया जहां दावक़ी ने निर्मल गलियारा, अब वहाँ सीमाओं का बेड़ा,