मेरे वजूद के ग़ुरूर ने कभी उसको मशहूर नहीं देखा है,
है फ़ख़्र उसे, उसने उम्र भर अपना घर भरपूर देखा है।
किस्सा कौन लिखे इन हालात का.!
क्या कभी किसी की इल्मियत को इतना मजबूर देखा है.?
हाँ..! घर पुराना है मेरा, अक्सर छत टपक जाती है।
कभी गर्म चाय की प्याली में,
उस छत से छलकती बारिश की बूँदों को टपकते देखा है?
उस छत से छलकती बारिश की बूँदों को टपकते देखा है?
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अब ठीक से देख नहीं पाती, पर एहसास से चमक जाती हैं,
उन आँखों को कभी स्वतः भीगते देखा है?
ज़्यादा फ़र्क़ करना आता नहीं उसे प्यार और रोष में..
कभी बहुत ग़ुस्से में डाँटते हुए माँ को रोते देखा है?
उन आँखों को कभी स्वतः भीगते देखा है?
ज़्यादा फ़र्क़ करना आता नहीं उसे प्यार और रोष में..
कभी बहुत ग़ुस्से में डाँटते हुए माँ को रोते देखा है?


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