मेरी बैसाखी में तेरा आना और होली में गुनगुनाना,
कभी बिन सावन हरी चुनरियाँ लहराना,
फागुन तीज के झूले, जैसे भादों की फुहारें नहाना..
और पूस में सर्द sweater से आधी हथेली निकाल bye Papa कह जाना;
………….
कैसे बताऊँ मेरी हर साँस में सिमटीं हैं कुछ यादें..
जो हक़ीक़त थीं कल;
कोई समझे तो समझे मुझे फ़क़ीर,
मेरी बेशुमार दौलत है तेरे-मेरे वो पल…!


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