क्यूँ काढ़े क़सीदे पतझड़ की शाख़ों पे,
क्यों बाँटे वादे पूनमी चाँद-सितारों के ?
क्यों हो पहरा सोच का, कहो ना अपनी अनकही,
क्यों ये मैं तय करूँ, तू सच है या सही.!
A tweety of desire blossoms in each heart... only few grow their wings strong enough to make a flight in veracity.
क्यूँ काढ़े क़सीदे पतझड़ की शाख़ों पे,
क्यों बाँटे वादे पूनमी चाँद-सितारों के ?
क्यों हो पहरा सोच का, कहो ना अपनी अनकही,
क्यों ये मैं तय करूँ, तू सच है या सही.!
जिस नज़ाकत से ये समुन्दर की लहरें,
किनारों पे आ पैरों को छू के जाती हैं ।
यक़ीन कहाँ होता है,
के इन्होंने कभी कश्तियाँ डुबोयी होंगी॥
तजुर्बा चाहो तो कुछ मिटा दो अपनी हस्ती को,
के दान ख़ाक में मिलकर गुल ए गुलज़ार होता है।
मतलब की है दुनिया, कौन किसका होता है,
अरे धोखा तो वही देता है, जिसपे भरोसा होता है ॥
...
ये अनंत स्याह रात सी ज़िंदगी है, सन्नाटे में शोर लपेटे हुए,
एक अरसा गुजर गया बेफ़िक्री से पलकें समेटे हुए,
अक्सर ढूँढता हूँ वो पापा कि परछाईं,
जहां तूफ़ानों में भी नींद आ जाती थी.!