Saturday, May 20, 2023

सच या सही

 क्यूँ काढ़े क़सीदे पतझड़ की शाख़ों पे,

क्यों बाँटे वादे पूनमी चाँद-सितारों के ?

क्यों हो पहरा सोच का, कहो ना अपनी अनकही,

क्यों ये मैं तय करूँ, तू सच है या सही.!


Sunday, May 7, 2023

लहरें..

​जिस नज़ाकत से ये समुन्दर की लहरें,

किनारों पे आ पैरों को छू के जाती हैं ।

यक़ीन कहाँ होता है,

 के इन्होंने कभी कश्तियाँ डुबोयी होंगी॥

Saturday, April 29, 2023

चाँदनी


दरख़्तों से पुराने सामान समेट रहा था,
कुछ तस्वीरों में मेरे साथ, तुम वापस नज़र आयी।
….
यादों में ज्येष्ठ की रातें थी,
गाँव के पोखर से छलकती चाँदनी बिसरायी ॥

Thursday, April 13, 2023

तजुर्बा

 तजुर्बा चाहो तो कुछ मिटा दो अपनी हस्ती को,

के दान ख़ाक में मिलकर गुल ए गुलज़ार होता है।

मतलब की है दुनिया, कौन किसका होता है,

अरे धोखा तो वही देता है, जिसपे भरोसा होता है ॥

Sunday, April 9, 2023

खामोशी


मंजिलें मिलके बदल जाती हैं, 
मुझे मेरे रास्ते पसंद हैं।

ख़ुद ख़ैरियत की तसल्ली अब दूर से टेलीफोन पर दे जाते हैं,
मुझे इन ‘दूरियों’ से दूरियाँ पसंद है ॥

...

निःशब्द होना यूँ तो फ़ितरत नहीं हमारी, पर,
बहुत शोर है मेरे अंदर, और मुझे खामोशी पसंद है…

Saturday, January 14, 2023

समझदार अल्हड़..!

​कल किसी नासमझ ने 'अल्हड़’ के आदी को समझदार कह दिया,          
मगरूर से मन में मेरे इठलाते 'मैं' का सामना 'हम' से हो गया।
जंग अच्छी थी मिजाज के जुबानों की,  
और कलम को अपना रोज़गार मिल गया ॥                              

सरकते डब्बों में ख़ुद को बंद कर लिया क्या ?
अब traffic का हिस्सा बन उसी में झल्लाये बैठे हो,
हम तो तीन यार, कैंची मार साइकिल पे सवार अच्छे थे।
‘मैं’ ने ख्वाहिशों को जरुरत ए आम बना लिया है, 
हम अंध स्पर्धा से अंजान ही अच्छे थे॥

ले लिया क्या toothpaste में नमक स्वादानुसार?
हम तो बचपन से colgate ही अच्छे थे ।
सुना है हिमालय से नामक भी गुलाबी आया है!
हम तो TATA Salt ही अच्छे थे॥

दोस्तों के नाम उपनाम में पहचान ढूँढते हो?
हम तो ‘चल बे साले’ ही अच्छे थे।
Golf, snooker सीख लिया जीतना? 
हम खो-खो, कबड्डी ही अच्छे थे ॥

देखा है google siri सुना रहे अब बच्चों को लोरियाँ, 
हमें तो नानी, दादी के क़िस्से ही अच्छे थे।
वक़्त की क़ीमत से अनजान हो अभी, लगा लो OTT सारे, 
हम तो हर इतवार ‘सुरभि’, ‘रंगोली’ ही अच्छे थे ॥

zomato swiggy ने जगह बना ली है खर्च कि खातों में,
हमें तो माँ के हाथ से २ निवाले ही अच्छे थे।
यक़ीन मानों समझदारी का ठप्पा छलावा है..!
हम नादान.., बेईमान से अच्छे थे॥

Friday, January 6, 2023

छाँव

 


ये अनंत स्याह रात सी ज़िंदगी है, सन्नाटे में शोर लपेटे हुए,
एक अरसा गुजर गया बेफ़िक्री से पलकें समेटे हुए,
अक्सर ढूँढता हूँ वो पापा कि परछाईं, 
जहां तूफ़ानों में भी नींद आ जाती थी.!