Thursday, June 6, 2024

मिट्टी का घर..

 


सूनी दिखाती है चाँदी की चौखट तुम्हारी,
गाँव की यारियाँ गँवा कर क्या सिर्फ़ रुपया ही कमाया है?

ख़ैर… 
सूनापन सताये तो बाअदब इस पार आ जाना,
पुराने क़िस्सों - कहकहों का हिस्सा, इसी शाम बन जाना।
भेंट, रोष और गुमान की क्या दरकार, तुम दिलख़ुश बेतकल्लुफ़ आना,
मैंने मेरा आशियाना दोस्ती के रंग से सजाया है ।।

खुश हूँ के कहीं मंज़िल को छोड़ कर और कभी नाकामियों से लड़ कर,
शहर की गलियों में, गाँव की मिट्टी से एक घर बनाया है।।

Wednesday, May 1, 2024

धुआँ..!


वो कश तुम्हारी थी, 

उड़ गया जो धुआँ हमारा हुआ;

इस इश्क़ का इखलाक तुम्हारा था, 

और.., ये इत्तेफाक हमारा हुआ ।



Friday, December 8, 2023

मुखौटा

हयात की तलाश में खुशियों का हिसाब कर चुका है,
माँ की परवाह से मोहब्बत की पहचान तक,
कुछ खो चुका है, और कुछ बँट गया है।
.
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लड़कपन गुजर गया उसका, अब मर्द बन रहा है वो! 

कभी जज़्बात में, कभी हालात में,
कभी साज में और कभी अल्फ़ाज़ में ।
कभी अंजाम में तो कभी आग़ाज़ में,
कभी शाम में तो कभी पैग़ाम में ॥
आँचल की छाँव से, पायल की झंकार तक,
कुछ बँट सा गया है वो !

ममता की पुकार से, इश्क़ की ललकार तक,
हर पल बँटा है वो।
कभी सिंदूर की लाज में और कभी कोख के उधार में,
बस बंटता रहा है वो  !

… मर गया बचपन, गुजर गई जवानी,
अब बन गया है मर्द वो .!

Wednesday, November 8, 2023

तू है…

मुझे इल्म है तेरी हर शिकायत का..

जिनसे तारूफ़ वफ़ा नहीं, वक़्त ने किया हैं, 

पर ये भी रुतबा है तेरे इश्क़ का..
जिसने वक़्त की दरिया में वफ़ा बांध लिया है।

अब इसे नाकामी नहीं, इंतहान ही समझ लेना, 
आशिक़ ना सही, फ़रियादी ही समझ लेना।

तू मंज़िल है अगर.!
तो तेरे रास्ते में हासिल हर मुक़ाम बेजान बियाबान नज़र आते हैं।
तू ख़्वाब है अगर.!
तो तेरे ख़्वाब-ओ-मिलन की ख़ुशबू मेरे अक्स को महकाते हैं|
हैं कोशिशें बेशुमार जो क्षितिज से एक झरोखा उधार माँग लूँ,

पर बहुत मुश्किल है उस दरार का दीदार,
जहां से रोशनी और अंधेरा समान नज़र आते हैं॥

Thursday, October 19, 2023

कुल्हड़ की उधारी



मेरी चाहत है कि मैं अपने आज से कुछ पिछड़ जाऊँ,
अपनी यादों के आशियाने में कुछ लम्हे पीछे चला जाऊँ।

रह गई थी कुछ चाहतें वहाँ अधूरी..
जहां उम्मीदों में मचलती मोहब्बत नाकाम थी,
कम थे रुपये पर ज़िंदगी आसान थी !
थोड़ी मोहलत दे दो मेरे आज से, बीते कल में उन्हें वहीं जी आऊँ॥

…

कुछ रह गई है यारी की उधारी, नुक्कड़ चाय पे उसे सुलटा आऊँ।


Sunday, October 15, 2023

रब पे उधार…

 है उसकी ही मर्ज़ी जो उसने हमें तुमसे मिलाया है,

कभी सोचा ना, उस दोस्ती के काबिल बनाया है।

कुछ कर्म उधार थे शायद रब पर हमारे,

इस मतलबी सी दुनिया में, तुझे मेरा दोस्त बनाया है।

Thursday, October 5, 2023

तजुर्बा ऐ इश्क़



शायद तू मेरा पहला प्यार नहीं…
पर तजुर्बा मेरे इश्क़ का बस इतना है,
की तेरा होना अब मेरे होने का बहाना है।
बेशक तेरी बाहों में किसी खुशनसीब का आशियाना है,
पर खुश हूँ के दिल में तेरे, मेरा भी एक ठिकाना है ॥