जिस मोड़ पर तू मुझसे छूटा,
वहाँ खड़ी मेरी फ़रेब जवानी थी…
पर जब तूने मुझे छोड़ा—
क्या तेरी मजबूरी थी?
तेरी क्या कहानी थी?
पर जब तूने मुझे छोड़ा—
क्या तेरी मजबूरी थी?
तेरी क्या कहानी थी?
चल, जो बीत गई सो बात गई…
बस उस वक़्त का हिसाब करा दे।
एक बरस लौट के आ,
ज़िन्दगी फिर से दिलबाग़ बना दे।
रह गई हैं अधूरी बचपन की कुछ यादें, आ, उन्हें पूरी करा दे—
एक बार फिर गर्मी की छुट्टी दिला दे,
दोस्तों से ध्रुव और राज की कॉमिक्स दिला दे,
एक बार ही सही,
Ludo में दीदी से जीता दे।
दोस्तों से ध्रुव और राज की कॉमिक्स दिला दे,
एक बार ही सही,
Ludo में दीदी से जीता दे।
दादी के हाथ से लड्डू बनवा दे,
नानी की गली में कुल्फ़ी वाले को बुला दे,
मम्मी से फ्रीज में Mango ice cream बनवा दे,
पापा की Vespa पे आगे खड़ा हूँ-
-चल, थोड़ा शहर घुमा दे।
नानी की गली में कुल्फ़ी वाले को बुला दे,
मम्मी से फ्रीज में Mango ice cream बनवा दे,
पापा की Vespa पे आगे खड़ा हूँ-
-चल, थोड़ा शहर घुमा दे।
मेरे मासूम से बचपन में, ‘वक़्त’ ने 'उम्र' को जोड़ दिया…
इतनी भी क्या नाराज़गी तेरी—ए बचपन!
तूने मुड़ कर देखना ही छोड़ दिया…!
इतनी भी क्या नाराज़गी तेरी—ए बचपन!
तूने मुड़ कर देखना ही छोड़ दिया…!

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